23 मार्च: सविनय अवज्ञा आंदोलन

23 March Satyagrah:_Brief Details (PDF copy)
23 March

  • दिल्ली में पानी और बिजली के बिल बढ़ने का केवल एक कारण – भ्रष्टाचार।
  • दिल्ली की जनता के लिए ये बिल भरना नामुमकिन हो रहा है।
  • जनता डरी हुर्इ है, एकजुट नहीं है।
  • इसी डर का  फायदा उठाकर शीला दीक्षित और बिजली कंपनियां दाम बढ़ाती जा रही हैं।
  • अभी बिजली के दामों में भारी बढ़ोतरी की शीला जी की तैयारी।
  • 5 हज़ार रुपये प्रति महीना प्रति परिवार बिजली बिल बढ़ सकता है।
  • दिल्ली की जनता को एकजुट करके उनके मन से डर निकालने के लिए अनिश्चितकालीन उपवास।
  • शहीद भगतसिंह के शहीदी दिवस 23 मार्च से शुरू होगा उपवास।
  • 23 मार्च से Civil Disobedience Movement
  • दिल्ली की जनता से अपील – 23 मार्च से अपने बिजली और पानी के बिल देना बंद करें।
  • जो जितने बिल रोक सकता है, रोक लें।
  • कम से कम एक बिल तो सभी रोकें।

 बिजली, पानी की बढ़ती कीमतों में भ्रष्टाचार के खिलाफ

सविनय अवज्ञा आंदोलन

 दिल्ली में पानी और बिजली के पूरे बिल नाजायज़ तरीके से आ रहे हैं। जनता महंगार्इ की वजह से कराह उठी है।

महंगार्इ के पीछे सिर्फ और सिर्फ एक कारण है – भ्रष्टाचार। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने बिजली पानी की कंपनियों से सांठगांठ करके इनका दाम इतना बढ़ा दिया है कि दिल्ली वालों का जीना हराम होता जा रहा है। वह कहतीं हैं कि कंपनियां घाटे में हैं इसलिए बिल बढ़ाना मजबूरी है। अगर बिल कम चाहते हो तो कूलर की जगह पंखा चलाओ, टी.वी. और फ्रीज़ कम इस्तेमाल करो इत्यादि।

शीला दीक्षित के इस भ्रष्टाचार से दिल्ली की जनता लुट रही है, लेकिन विपक्ष में बैठी भारतीय जनता पार्टी भी बिजली पानी की कीमतों के मुद्दों पर या तो मौन है या फिर औपचारिक प्रदर्शन का नाटक करती है। जाहिर है कि भाजपा को भी लगता है कि अगर आगे कभी उसकी सरकार बनी तो उसे भी तो यही करना है।

सवाल यह है कि ऐसे में जनता क्या करे?

सविनय अवज्ञा आंदोलन :-

गांधी जी कहते थे, यदि हमारे ऊपर अन्याय हो तो उसके खिलाफ आवाज़ उठाना हमारा धर्म है। जो लोग उसके खिलाफ आवाज़ नहीं उठाते वो एक तरह से अन्याय का साथ देते हैं और अधर्म के भागीदार होते हैं।

ऐसी परिस्थिति में दिल्ली के सभी नागरिकों का यह फर्ज़ बनता है कि वो पानी और बिजली के नाजायज़ बिल देना बंद करें। इन बिलों में जितना जायज़ हिस्सा है केवल उतना दें, नाजायज़ हिस्से को रोक लें। जायज़ बिल कितना बनता है? कहना मुश्किल है। जब तक इन कंपनियों का आडिट नहीं कराया जाएगा सच्चार्इ का पता नहीं लगेगा। लेकिन यदि बरजिंदर सिंह जी की माने तो बिजली के दाम आधे से भी कम होने चाहिए। इसीलिए लोग आधा बिल ही दें। अगर बिजली कंपनियां और जल बोर्ड आधा बिल लेने से इंकार करें तो वो अपना पूरा बिल रोक लें। ऐसा करने पर बिजली कंपनियां और सरकार जो भी सज़ा देती हैं उसे भुगतने के लिए सभी तैयार रहे। यही धर्म है। यही सबका फ़र्ज़ है। इसी असहयोग आंदोलन के दम पर महात्मा गांधी ने अंग्रेज़ों को झुकने पर मजबूर कर दिया था। आज हम भी इस असहयोग आंदोलन के दम पर कंपनियों व सरकार को झुका सकते हैं और नाजायज़ बढ़े हुए दामों से मुक्ति पा सकते हैं।

पर क्या दिल्ली के लोग ऐसा करेंगे? पिछले वर्ष जब बिजली के बिल अचानक बढ़ा दिए गए, जनता त्राहि-त्राहि करने लगी। हमने जनता के साथ मिलकर 23 सितंबर को जंतर मंतर पर इसका विरोध करते हुए बिजली का बिल जला कर बिजली सत्याग्रह शुरु किया। बहुत लोगों ने बिजली का नाजायज़ बिल देना बंद करके सत्याग्रह प्रारंभ किया। सरकार के इशारे पर  कंपनियों ने जनता का डराने के लिए कर्इ लोगों के बिजली के कनेक्शन कटवा दिए। हम लोगों ने जनता के घर जाकर कटे कनेक्शन जोड़े। पर सरकार व कंपनियों ने दहशत पैदा करने के लिए उनके ऊपर मुकदमे लगाए, पेनल्टी लगार्इ। लोगों में डर का असर दिखार्इ देने लगा। हमने पूरी दिल्ली में एक सर्वे करवाया। अधिकतम लोगों का कहना है कि बिजली व पानी के बढ़े बिलों से हम सभी परेशान हैं। हम बढ़े हुए बिल देने की स्थिति में नहीं है लेकिन बिजली बिल न देने व सत्याग्रह में शामिल होने पर कनेक्शन कटने, गिरफ्तारी, मुकदमा व पेनल्टी से डर लगता है।

पिछले एक महीने से हम लोग दिल्ली में जनसभाएं कर रहे हैं, दिल्ली की गलियों में लोगों से मिल रहे हैं। बातचीत में निकल कर आ रहा है कि लोग डरे हुए हैं। उनका डर है कि – बिजली कट गयी तो? पानी कट गया तो? जेल हो गर्इ तो? केस हो गया तो? पेनल्टी हो गर्इ तो? सभी के मन में डर है।

आज पूरी दिल्ली गुलामों की तरह डरी हुर्इ है। इसी डर का फायदा उठाकर कंपनियों से साठगांठ करके सरकार पुन: बिजली व पानी के दाम बढ़ाने की साज़िश कर रही है। बिजली व पानी देश का है, इसकी मालिक जनता है, लेकिन साज़िश करके सरकार व कंपनियों ने बिजली व पानी को अपने कब्ज़े में कर लिया है और हमारे अंदर डर पैदा करके हमें नाजायज़ तरीके से लूट रहे हैं।

जिस मुल्क की सारी जनता डरी हुर्इ हो, वह मुल्क कभी प्रगति नहीं कर सकता। 1947 में हमें आज़ादी इसलिए मिली क्योंकि उस वक्त हमारे पुरखे, आज़ादी के सिपाही, डरे नहीं थे।

अनिश्चितकालीन उपवास:

दिल्ली की जनता के मन से डर निकालना होगा। दिल्ली की जनता को संगठित कारना होगा। इसके लिए मैं 23 मार्च, 2013 से उपवास पर बैठ रहा हूं। 23 मार्च एक क्रांतिकारी दिन है। शहीद भगत सिंह का शहीदी दिवस है। यह दिन हमें देश के लिए मर मिटने वालों की याद दिलाता है। इस दिन से मैं अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठूंगा। यह अनशन नहीं है। किसी सरकार के खिलाफ नहीं है। न ही किसी सरकार से मेरी कोर्इ मांग है। यह अनिश्चितकालीन उपवास है। पिछले कर्इ वर्षों से कर्इ धरने, अनशन और प्रदर्शन किए। इन सरकारों से कर्इ बार न्याय की मांग की। धीरे-धीरे समझ में आने लगा कि इन सरकारों का चरित्र तो अंग्रेज़ों से भी बदतर है। इनसे किसी भी तरह की न्याय की उम्मीद करना बेवकूफी होगी। इसीलिए इस उपवास के दौरान मेरी किसी भी सरकार से कोर्इ भी मांग नहीं है। मेरा सरोकार और मेरी सीधी अपील जनता से है – उठो, जागो । देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने की इस लड़ार्इ में शामिल हो जाओ। मेरी दिल्ली की जनता से सीधी अपील है कि वो अपने मन का डर निकाले। बिजली और पानी बिलों का नाजायज़ और आधा हिस्सा देना बंद करें। यदि सरकार और बिजली कंपनियां आधा बिल लेने से मना करती हैं तो वो अपना पूरा बिल रोक लें।

अगर मैं दिल्ली की जनता से सविनय अवज्ञा आंदोलन की अपील करता हूं तो जाहिर है कि सबसे पहले इसका पालन मुझे करना चाहिए। मैं अब अधिकतर दिल्ली में ही रहना शुरू करूंगा और जहां मैं रहूंगा वहां का पानी और बिजली का बिल तब तक नहीं दूंगा जब तक सविनय अवज्ञा आंदोलन चलेगा। मेरा परिवार गाजि़याबाद के एक फ्लैट में रहता है। हालांकि यह मुद्दा दिल्ली का है पर फिर भी जब तक दिल्ली का सविनय अवज्ञा आंदोलन चलेगा मैं गाजि़याबाद के घर का बिजली पानी का बिल नहीं दूंगा।

कब तक बिजली बिल न दें?

तब तक बिल दें जब तक शीला दीक्षित जी निम्न बातें लागू कर दें

  • शीला दीक्षित जी इन बिजली कंपनियों का सीएजी से आडिट करायें।
  • जब तक आडिट नहीं हो जाता, तब तक बिजली बिलों की और बढ़ोतरी बंद की जाए।
  • जब तक आडिट नहीं हो जाता, तब तक सुधाकर जी द्वारा बिजली के दाम बढ़ाने वाले आदेशों पर रोक लगार्इ जाए।
  • नियम बनाया जाए कि जिनका गलत बिल भेजे गए, उन मामलों में पहले बिल ठीक किया जाए, न कि पहले बिल भरने पर आग्रह किया जाए, गलत बिल भेजने पर कंपनी पर पेनल्टी लगनी चाहिए।
  • पूरी दिल्ली में मीटर 25 प्रतिशत से 40 प्रतिशत तेज चल रहे हैं। DERC ने ये माना है। अभी तक 10 सालों में तेज मीटर से कंपनियों को कितना फायदा हुआ। तेज मीटर बंद किए बिना बिल न लिए जाएं।
  • पानी के दाम कम से कम आधे किए जाएं।

अगर बिजली काट जाएं तो क्या करें ?

जब पूरी दिल्ली एकजुट हो जाएगी तो शीला दीक्षित की हिम्मत नहीं होगी कि वो पूरी दिल्ली की बिजली काटें।

पर फिर भी यदि बिजली काटते हैं तो आप उसे वापस जोड़ लीजिए। यदि आपको जेल जाने से डर लगता है तो हमें फोन कर दीजिए। हमारे कार्यकर्ता आकर बिजली जोड़ देंगे।

यही डर तो लोगों को निकालना है। इसका मुकाबला हम अकेले नहीं कर सकते, एकजुट होकर ही कर सकते हैं।

मेरे इस उपवास का मकसद है, दिल्ली के लोगों के मन से डर निकालना और उन्हें संगठित करना। जिन लोगों को ज़्यादा डर लगता है वो कम से कम एक बिल तो रोकें, दो बिल तो रोकें, शुरुआत तो करें। इस लड़ार्इ में अपनी तरफ से कुछ आहुति दें। मेरी अपील सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं से ही होगी, व्यवसायिक और औधोगिक उपभोक्ताओं से नहीं।

बिजली के दाम कर्इ गुणा और बढ़ाने की तैयारीक्या दिल्ली सरकार, केंद्रीय सरकार, DERC और बिजली कंपनियों में मैच फिकिसंग हो गर्इ है?

अभी असली गाज़ तो दिल्ली वालों पर गिरने वाली है। अगर तुरंत कुछ नहीं किया गया तो शीला दीक्षित जी बिजली के दाम कर्इ गुणा बढ़ाने की पूरी तैयारी कर चुकी हैं।

सुधाकर जी ने शीला दीक्षित सरकार को अभी हाल ही में 1 फरवरी को पत्र लिखा है कि पिछले चार साल में बिजली कंपनियों को 20 हज़ार करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। या तो सरकार बिजली कंपनियों को 20 हज़ार करोड़ रुपये दें या वो दिल्ली में बिजली के दाम और बढ़ाएंगे। अब चाहे सरकार यह पैसा सीधे बिजली कंपनियों को दे या बिजली के दाम बढ़ाए जाएं, अंतत: पैसा तो जनता की जेब से ही निकलना है। दिल्ली में 35 लाख घरेलू कनेक्शन हैं। अगर 20 हज़ार करोड़ को 35 लाख से भाग दिया जाए, प्रति परिवार प्रति महीना पांच हज़ार रुपये का बोझ जनता पर पड़ने वाला है।

ऐसा लगता है कि बिजली कंपनियों, दिल्ली सरकार, केंद्रीय सरकार और DERC के बीच में मैच फिकिसंग हो गर्इ है? दिल्ली में जानबूझकर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि बिजली कंपनियां भारी घाटे में है। और उनको तुरंत पैसा नहीं दिया गया तो ये बिजली कंपनियां बिजली नहीं खरीद पाएंगी। और दिल्ली में बिजली की कमी हो जाएगी। पिछले हफ्रते 8 करोड़ रुपये न देने पर पावरगि्रड ने BYPL की 400 मेगावाट बिजली काट दी। उधर  यूपी सरकार का पावरगि्रड को 300 करोड़ रुपये देना बनता है, इसके बावजूद पावरगि्रड ने यूपी सरकार की बिजली नहीं काटी। तो क्या शीला दीक्षित जी केंद्र सरकार के सहयोग से दिल्ली की जनता को ब्लैकमेल कर रहीं हैं? इसका मतलब शीला दीक्षित जी केंद्र सरकार के साथ मिलकर बिजली कंपनियों को सीधे या परोक्ष रूप से 20 हज़ार करोड़ रुपये देने का मन बना चुकी है। यह इससे भी साबित होता है कि 1 फरवरी को DERC के अध्यक्ष श्री सुधाकर जी ने शीला दीक्षित सरकार को चिट्ठी लिखकर कहा कि बिजली कंपनियों को 20 हज़ार करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। उसी पत्र में सुधाकर जी ने शीला दीक्षित जी को यह भी सुझाव दे डाला कि केंद्र सरकार की कौन-कौन सी योजनाओं के तहत बिजली कंपनियों को यह पैसा दिया जा सकता है। अपने पत्र में  उन्होंने धमकी दी कि यदि ये पैसा बिजली कंपनियों को नहीं दिया गया तो दिल्ली में बिजली के दाम बढ़ा देंगे। पत्र मिलते ही शीला दीक्षित जी ने तुरंत केंद्रीय उर्जा मंत्री से मिलीं। जितनी शीघ्रता से शीला दीक्षित जी केंद्रीय उर्जा मंत्री से मिलीं, ऐसा लगता है कि शीला दीक्षित जी इस पत्र का इंतजार कर रहीं हों।

कुछ प्रश्न

इस उपवास से क्या हासिल होगा? क्या इस उपवास से दिल्ली सरकार बिजली के दाम कम करेगी?

इस उपवास से दिल्ली संगठित होगी, दिल्ली के लोग एकजुट होंगे। दिल्ली के लोगों के मन का डर निकलेगा, वो एकजुट होकर महंगार्इ और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने को तैयार होंगे। अगर ऐसा हो जाता है तो निश्चित तौर पर शीला दीक्षित को बिजली के दाम कम करने ही पड़ेंगे। अगर वो ऐसा नहीं करती हैं तो दिल्ली के लोग आने वाले चुनाव में उन्हें उखाड़ फेकेंगे।

बिजली, पानी का बिल देना गैरकानूनी है ऐसा करने से आप लोगों को कानून तोड़ने के लिए उकसा रहे हैं?

मैं गाँधी जी के शब्दों और उनके आंदोलनों की तरफ आप सब का ध्यान दिलाना चाहूंगा। गाँधी जी का कहना था कि जो भी अन्यायपूर्ण कानून हो, उसे तोड़ना सबका फ़र्ज़ है। ऐसे कानून को मानना अन्याय और अधर्म का साथ देने जैसा है। इसी को तो सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) कहते थे। इसी को वो सत्याग्रह कहते थे। उन्होंने अंग्रेज़ों द्वारा बनाया गया नमक कानून तोड़ा क्योंकि वो अन्यायापूर्ण था।

गाँधी जी तो विदेशियों के खिलाफ लड़ रहे थे, क्या अपनी सरकार के खिलाफ यह करना ठीक है?

मैं इससे पूरी तरह से असहमत हूं। गाँधी जी ने कभी भी नहीं कहा कि उन्हें गौरी चमड़ी से नफरत थी। सत्याग्रह और सविनय अवज्ञा शाश्वत नियम है। अन्याय करने वाला चाहे कोर्इ भी हो – गोरी चमड़ी वाला या काली चमड़ी वाला – वह नियम हर जगह लागू होता है।

ऐसे तो कोर्इ भी हत्यारा या बलात्कारी कानून तोड़कर कहेगा कि वो सत्याग्रह कर रहा है

दोनों परिस्थितियों में फर्क हैं। जैसा कि अन्ना जी कहते हैं – देश की आज़ादी के लिए लड़ते हुए जेल जाना भूषण है लेकिन बलात्कार या हत्या करके जेल जाना दूषण है। इसी तरह से अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए कानून तोड़ना भूषण है जबकि हत्या और बलात्कार करके किसी को क्षति पहुंचाना दूषण है।

 क्या आप अराजकता नहीं फैला रहे हैं?

शीला जी के भ्रष्टाचार और भाजपा की चुप्पी की वजह से आज दिल्ली के हर घर में अराजकता फैला है। महंगार्इ की वजह से घर चलाना मुश्किल हो गया है, बच्चे पालने मुश्किल हो गए हैं। हमारे इस कदम से जनता राहत की सांस लेगी पर हो सकता है भाजपा, कांग्रेस और बिजली कंपनियों में अराजकता फैल जाए।

 अब तो आप लोगों ने पार्टी बना ली है, आपको चुनाव लड़ना है, अब तो आप लोग राजनीति कर रहे हैं

हम मानते हैं कि हम राजनीति कर रहे हैं पर शीला दीक्षित जी अनिल अंबानी और टाटा की राजनीति करती हैं हम जनता की राजनीति कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस भ्रष्टाचार की राजनीति करते हैं। हम भ्रष्टाचार के खिलाफ राजनीति कर रहे हैं। लाल बहादुरशास्त्री ने भी राजनीति की थी। बाबा साहेब अंबेडकर और सरदार पटेल ने भी राजनीति की थी। उन्होंने देशभक्ति और र्इमानदारी की राजनीति की थी। आज की गंदी राजनीति को बदल कर हम वापस उसी राजनीति को कायम करना चाहते हैं।

बिजली बिलों से बेहाल जनता :

  • गुलशन, सावनपार्क माडल टाउन में रहता है। उसका रु. 27,000- बिजली का बिल आया है।
  • खान बाबा, वजीरपुर की झुग्गी-झोपड़ी में रहते हैं। उनका रु. 2,11,000- का बिल आया है।
  • शकुंतला के पति रिक्शा चलाते हैं। शकुंतला, शालीमार बाग की झुग्गी में रहती हैं, उनका छ: महीने का रु. 10,530- बिल आया है।
  • गणेश चाय का ढाबा लगाता है। उसका पांच महीने का रु. 12,240- बिल आया है।

बिजली के बिलों को लेकर दिल्ली की जनता 4 तरह से परेशान है :-

  1. बिजली के दाम गलत तरीके से अनाप-शनाप बढ़ा दिए गए।
  2. कर्इ लोगों के बिलकुल बेतुके और गैर-कानूनी तरीके से हज़ारों रुपये के बिजली के बिल बना दिए जाते हैं। जब वो बिल ठीक कराने जाते हैं तो उन्हें कहा जाता है कि पहले पूरा बिल भरो, फिर ठीक करेंगे। कर्इ बार बिल ठीक कराने के लिए मोटी रिश्वत मांगी जाती है।
  3. लगभग पूरी दिल्ली में बिजली के मीटर तेज चल रहे हैं। इस पर कोर्इ कार्रवार्इ नहीं की गर्इ है।
  4. दिल्ली के लोग बिजली कंपनियों की ‘रेड राज से दुखी हैं। ये कंपनियां किसी के भी घर रेड कर देती हैं। उनसे मोटी रिश्वत मांगी जाती है और रिश्वत न देने पर उनके खिलाफ केस बना दिया जाता है।

दिल्ली में बिजली महंगी क्यों हुर्इ?

दिल्ली में बिजली के दाम पिछले 2 वर्षों में लगभग दो गुना हो गए हैं। यह केवल और केवल भ्रष्टाचार की वजह से हुए हैं। बिजली कंपनियां अपने खातों में भारी गड़बड़ी करके फर्जी घाटा दिखाती हैं जिसके आधार पर बिजली के दाम बढ़ा दिए जाते हैं। इन कंपनियों का आडिट क्यों नहीं कराया जाता?

2010 में इन कंपनियों ने 630 करोड़ रुपये के घाटे का दावा किया था और दिल्ली में बिजली के दाम बढ़ाने की मांग की थी लेकिन DERC के तत्कालीन अध्यक्ष श्री बरजिंदर सिंह ने इनकी हेराफेरी पकड़ ली। उन्होंने पाया कि इन कंपनियों को 630 करोड़ का घाटा नहीं बलिक 3577 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। उन्होंने एक आदेश बनाया। इस आदेश में उन्होंने लिखा कि दिल्ली में बिजली के दाम बढ़ने नहीं बलिक 23 प्रतिशत घटने चाहिए। उसी आदेश में उन्होंने यहां तक लिखा कि आने वाले वर्षों में इन कंपनियों को और भी मुनाफा होगा और आने वाले वर्षों में बिजली के दाम और भी कम होंगे।

यह आदेश 5 मर्इ 2010 की सुबह पास होने वाला था। 4 मर्इ 2010 को शीला दीक्षित सरकार ने चिट्ठी लिखकर बरजिंदर सिंह जी को यह आदेश पारित करने से रोक दिया। प्रश्न उठता है कि आखिर शीला दीक्षित सरकार ने ऐसा क्यों किया? शीला दीक्षित जी तो हमारी मुख्यमंत्री हैं। दिल्ली की जनता ने उन्हें वोट दिया था। अगर दिल्ली में बिजली के दाम कम हो रहे थे तो उन्हें तो खुश होना चाहिए था। फिर शीला दीक्षित जी ने इस आदेश को क्यों रोका? इससे साफ जाहिर है कि शीला जी की बिजली कंपनियों से सांठगांठ है। जनता के हितों को ताक पर रखकर वो टाटा और अंबानी को फायदा पहुंचा रही हैं।

मजे की बात यह है कि भाजपा भी इस षड़यंत्र में शीला जी के साथ थी। भाजपा ने इस मुद्दे को विधानसभा या संसद में एक बार भी नहीं उठाया।

इस कार्रवार्इ पर दिल्ली हार्इ कोर्ट ने शीला जी को बुरी तरह लताड़ा। दिल्ली हार्इ कोर्ट के उस आदेश के कुछ अंश संलग्न हैं।

कुछ महीनों बाद बरजिंदर सिंह जी रिटायर हो गए। उनकी जगह शीला जी ने पी. सुधाकर को DERC का चेयरमैन बना दिया। सुधाकर जी का एक ही काम था – जो बिजली कंपनियां कहें वो करते जाओ। तब से दिल्ली वालों के लिए मुसीबत आ पड़ी। सुधाकर जी ने आते ही कहा कि बिजली कंपनियों को भारी घाटा हो रहा है इसलिए दिल्ली में बिजली के दाम बढ़ाने की जरूरत है। 2011 में उन्होंने 22 प्रतिशत बिजली के दाम बढ़ा दिए, 2012 में 32 प्रतिशत और अभी कुछ दिन पहले 3 प्रतिशत बिजली के दाम बढ़ा दिए।

अगर इन सब बातों को जोड़ा जाए तो जनवरी 2011 के मुकाबले दिल्ली में बिजली के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं।

बिजली कंपनियों का घाटा सरासर फर्जी हैं। इसके कुछ उदाहरण:

  1. पिछले साल बिजली कंपनियों के जांच (इंस्पेक्शन) के दौरान पता चला कि दिल्ली के लगभग 10 प्रतिशत उपभोक्ताओं की बिजली कंपनियों ने जीरो खपत दिखार्इ हुर्इ है। जबकि उन उपभोक्ताओं ने अपना-अपना बिजली का बिल जमा किया था। इससे जाहिर है कि ये कंपनियां अपनी आमदनी को छिपा रही हैं।
  2. अनिल अंबानी ने अपने ही ग्रुप की कुछ और कंपनियां बनार्इ हैं। दिल्ली की बिजली कंपनियां इन ग्रुप कंपनियों से महंगे में बिजली खरीद कर इन्हीं को सस्ते में बेचती हैं और फर्जी घाटा बनाती है।
  3. बिजली कंपनियां बाज़ार से सीधे सामान न खरीद कर अपनी ग्रुप कंपनियों से खरीदती हैं। यह सामान बाज़ार भाव से कर्इ ज्यादा मूल्य पर खरीदा जाता है और इस तरह से फर्जी घाटा दिखाया जाता है।
  4. दिल्ली को जितनी बिजली की जरूरत है उससे दोगुनी बिजली महंगे दामों में खरीद कर आगे सस्ते दामों में बेची जाती है। इस एक कारण की वजह से हज़ारों करोड़ों का नुकसान दिखाया गया है।

पानी क्यों महंगा हुआ?

दिल्ली में पानी की भी यही समस्या है। आधी से ज़्यादा दिल्ली में पानी नहीं आता, केवल बिल आते हैं। पानी आता है तो गंदा आता है। बिल इतने ज़्यादा बढ़-चढ़ कर आ रहे हैं कि लोगों के लिए पानी के बिल जमा कराना नामुमकिन हो रहा है। जैसे :-

  • रंजीत सिंह, सुंदर नगरी के पुनर्वास बस्ती में रहते हैं। उनका पांच महीने का पानी का बिल 5,558 रुपये आया है।
  • शीला, नंदनगरी में रहती हैं उनका चार महीने का पानी का बिल 12,837 रुपये आया है।
  • मित्र बहादुर भी दिल्ली के एक पुनर्वास बस्ती में रहते हैं। उनका भी पांच महीने का पानी का बिल 16,576 रुपये आया है।

पानी के दाम बढ़ने का कारण भी भ्रष्टाचार है। पिछले नौ साल में एक आम परिवार का पानी का बिल 18 गुना बढ़ गया। इन्हीं नौ सालों में दिल्ली जल बोर्ड में 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का भ्रष्टाचार हुआ। ये 10,000 करोड़ रुपये हमारे पानी के बिलों में लग कर आ रहे हैं। इन 10,000 करोड़ रुपये के काम यदि र्इमानदारी से कराए जाते तो दिल्ली के लोगों के घरों में बेहद सस्ता और साफ पानी पहुंच जाता।

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